जब खामोश आँखो से

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जब 💧खामोश 💧आँखो💧 से 💧बात💧 होती 💧है💧
ऐसे 💧ही 💧मोहब्बत💧 की💧 शुरुआत 💧होती 💧है💧
तुम्हारे💧 ही💧 ख़यालो💧 में 💧खोए💧 रहते 💧हैं💧
पता 💧नही💧 कब💧 दिन 💧और 💧कब 💧रात 💧होती 💧है…💧…..

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